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Wednesday, 11 January 2012

Persident's assent for Lokpal bill's Introduction in RajyaSabha


राज्यसभा में लोकपाल विधेयक के प्रस्तुतीकरण के लिए राष्ट्रपति कि पूर्व अनुमति कि आवश्यकता  


राज्य सभा में लोकपाल बिल प्रस्तुति के समय कुछ समाचार पत्रों में कुछ भ्रामक खबरें छपी थी कि लोकपाल बिल को राज्यसभा में प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति का अनुमोदन आवश्यक था| ऐसी खबरें वास्तव में निम्न मिथ्य आधारों पर छपी थी   

  • लोकपाल बिल लोकसभा से कई संशोधनो के बाद पारित हो सका|
वास्तविकता-- संविधान में ऐसा कुछ नहीं है कि किसी बिल के लिए सिर्फ इसलिए राष्ट्रपति का अनुमोदन आवश्यक है क्योंकि वह बिल संसद के एक सदन में कई संशोधनों के बाद  अपनाया गया है |


  •   क्योंकि लोकपाल का खर्च भारत की संचित निधि पर भारित होगा एवं  संविधान के अनुच्छेद 117 (3) के अनुसार ऐसे किसी बिल कि किसी सदन में प्रस्तुति से पूर्व राष्ट्रपति का अनुमोदन आवश्यक है|
वास्तविकता-- लोकपाल बिल कि लोकसभा में प्रस्तुति से पूर्वे ही राष्ट्रपति का अनुमोदन ले लिया गया था एवं अलग से राज्यसभा के लिए अनुमोदन कि आवश्यकता नहीं थी| परन्तु अनु० 117(3) में शब्दों कि जटिलता के कारण ऐसा प्रतीत होता है कि राज्यसभा के लिए अलग से अनुमोदन कि आवश्यक थी|
मगर यह दिलचस्प है,कि  अनुच्छेद 117 (1) में पहले से स्पष्ट है कि अनु० 110  में वर्णित किसी भी धन विधेयक को केवल लोक सभा में ही रखा जा सकता है|


अनु० 110. ''धन विधेयक'' की परिभाषा--(1) इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, कोई विधेयक धन विधेयक समझा जाएगा यदि उसमें केवल निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों से संबंधित उपबंध हैं, अर्थात्‌ :--

(क) किसी कर का अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन;
(ख) भारत सरकार द्वारा धन उधार लेने का या कोई प्रत्याभूति देने का विनियमन अथवा भारत सरकार द्वारा अपने पर ली गई या ली जाने वाली किन्हीं वित्तीय बाध्यताओं से संबंधित विधि का संशोधन;
(ग) भारत की संचित निधि या आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा, ऐसी किसी विधि में धन जमा करना या उसमें से धन निकालना;
(घ) भारत की संचित निधि में से धन का विनियोग;
(ङ) किसी व्यय को भारत की संचित निधि पर भारित व्यय घोषित करना या ऐसे धन की अभिरक्षा या उसका निर्गमन अथवा संघ या राज्य के लेखाओं की संपरीक्षा; या
(च) भारत की संचित निधि या भारत के लोक लेखे मद्धे धन प्राप्त करना अथवा ऐसे धन की अभिरक्षा या उसका निर्गमन अथवा संघ या राज्य के लेखाओं की संपरीक्षा; या
(छ) उपखंड (क) से उपखंड (च) में विनिर्दिष्ट किसी विषय का आनुषंगिक कोई विषय।
(2) कोई विधेयक केवल इस कारण धन विधेयक नहीं समझा जाएगा कि वह जुर्मानों या अन्य धनीय शास्तियों के अधिरोपण का अथवा अनुज्ञप्तियों के लिए फीसों की या की गई सेवाओं के लिए फीसों की मांग का या उनके संदाय का उपबंध करता है अथवा इस कारण धन विधेयक नहीं समझा जाएगा कि वह किसी स्थानीय प्राधिकारी या निकाय द्वारा स्थानीय प्रयोजनों के लिए किसी कर के अधिरोपण,
उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन का उपबंध करता है।
(3) यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं तो उस पर लोकसभा के अध्यक्ष का विनिश्चय अंतिम होगा।
(4) जब धन विधेयक अनुच्छेद 109 के अधीन राज्य सभा को पारेषित किया जाता है और जब वह अनुच्छेद 111 के अधीन अनुमति के लिए राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है तब प्रत्येक धन विधेयक पर लोकसभा के अध्यक्ष के हस्ताक्षर सहित यह प्रमाण पृष्ठांकित किया जाएगा कि वह धन विधेयक है।


117. वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध—
(1) अनुच्छेद 110 के खंड (1) के उपखंड (क) से उपखंड (च) में विनिर्दिष्ट किसी विषय के लिए उपबंध करने वाला विधेयक या संशोधन राष्ट्रपति की सिफारिश से ही पुरःस्थापित या प्रस्तावित किया जाएगा, अन्यथा नहीं और ऐसा उपबंध करने वाला विधेयक राज्य सभा में पुरःस्थापित नहीं किया जाएगा।  
परन्तु किसी कर के घटाने या उत्सादन के लिए उपबंध करने वाले किसी संशोधन के प्रस्ताव के लिए इस खंड के अधीन सिफारिश की अपेक्षा नहीं होगी।
(2) कोई विधेयक या संशोधन उक्त विषयों में से किसी के लिए उपबंध करने वाला केवल इस कारण नहीं समझा जाएगा कि वह जुर्मानों या अन्य धनीय शास्तियों के अधिरोपण का अथवा अनुज्ञप्तियों के लिए फीसों की या की गई सेवाओं के लिए फीसों की मांग का या उनके संदाय का उपबंध करता है अथवा इस कारण नहीं समझा जाएगा कि वह किसी स्थानीय प्राधिकारी या निकाय द्वारा स्थानीय प्रयोजनों के लिए किसी कर के अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन का उपबंध करता है। 
(3) जिस विधेयक को अधिनियमित और प्रवर्तित किए जाने पर भारत की संचित निधि में से व्यय करना पड़ेगा वह विधेयक संसद‌ के किसी सदन द्वारा तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक ऐसे विधेयक पर विचार करने के लिए उस सदन से राष्ट्रपति ने सिफारिश नहीं की है।